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Updated: 02 September 2026 | Hindi News Portal
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आज का मुद्दा पर प्रकाशित खबरों में स्थानीय संदर्भ, सत्यापन और पाठकों के काम की जानकारी को प्राथमिकता दी जाती है।
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करोड़ों के राजस्व पर सवाल, जांच के बजाय फिर चिनार इम्पेक्स को जिम्मेदारी देने की तैयारी!

जवाब देने से बचते रहे वरिष्ठ प्रबंधक आर. के. शर्मा बाह्य विज्ञापन को लेकर जब हमने अजीबोगरीब जवाब दाखिल करने वाले वरिष्ठ प्रबंधक आर. के. शर्मा से मिलकर पुरे गड़बड़झाले पर कार्रवाही की बात करनी चाही तो वरिष्ठ प्रबंधक साहब दफ़्तर में नहीं मिले वहीं दूरभाष को संपर्क करने पर वरिष्ठ प्रबंधक साहब ने अगले हफ्ते तक मीटिंग में व्यस्त होने का हवाला दिया,बात बात पर मीटिंग करने वाले अधिकारीगण शिकायत करने के बाद भी कार्रवाही के नाम पर लीपापोती में लगे रहते हैँ ज़ो अपने आप में सवालिया निशान खड़ा करती है।

आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क | Updated: 02 Sep 2026, 04:32 PM | Views: 0 | 3 मिनट पढ़ें
करोड़ों के राजस्व पर सवाल, जांच के बजाय फिर चिनार इम्पेक्स को जिम्मेदारी देने की तैयारी!

इस रिपोर्ट में क्या खास है?

  • खबर को स्थानीय पाठकों के संदर्भ में सरल भाषा में समझाया गया है।
  • जहां उपलब्ध हो, आधिकारिक जानकारी, प्रत्यक्ष बयान और जमीन से मिली जानकारी को आधार बनाया जाता है।
  • नई जानकारी आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाता है और तारीख ऊपर दी जाती है।

 

नोएडा प्राधिकरण के जवाब ने उठाए कई गंभीर सवाल, फुटओवर ब्रिज के विज्ञापन ठेके में अनियमितताओं की शिकायत पर केवल ई-निविदा प्रक्रिया का हवाला

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के कालिंदी कुंज प्रवेश मार्ग पर महामाया फ्लाईओवर से पहले स्थित फुटओवर ब्रिज के विज्ञापन संचालन और रखरखाव को लेकर की गई शिकायत पर प्राधिकरण ने अपना जवाब दिया है। शिकायतकर्ता द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में टेंडर, अनुबंध, विज्ञापन क्षेत्रफल, राजस्व और भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी। हालांकि, प्राधिकरण के जवाब में विस्तृत जांच अथवा वित्तीय ऑडिट की कार्रवाई बताने के बजाय फुटओवर ब्रिज के पुनः संचालन एवं अनुरक्षण के लिए ई-निविदा प्रक्रिया में पत्रावली होने की जानकारी दी गई है।

शिकायत के अनुसार नोएडा प्राधिकरण द्वारा कालिंदी कुंज प्रवेश मार्ग पर महामाया फ्लाईओवर से पूर्व स्थित फुटओवर ब्रिज का कंस्ट्रक्शन , डेवलपमेंट , ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस (CDOM) कार्य चिनार इम्पेक्स, नोएडा को लगभग 10 वर्ष की अवधि के लिए दिया गया था।

शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के समक्ष दावा किया कि संबंधित अनुबंध की अवधि 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद कंपनी द्वारा फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन प्रदर्शन एवं अन्य गतिविधियां जारी रखे जाने की शिकायत की गई। यह भी आरोप लगाया गया कि अनुबंध में कंपनी को केवल 96 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विज्ञापन लगाने की अनुमति थी, जबकि मौके पर लगभग 200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विज्ञापन लगाए जाने की बात सामने आई है।

शिकायत में यह भी कहा गया कि यदि विज्ञापन क्षेत्रफल और अनुबंध की अन्य शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इससे नोएडा प्राधिकरण को पिछले करीब 10 वर्षों में एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के राजस्व की संभावित क्षति हुई हो सकती है। इसी को देखते हुए शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की विस्तृत जांच और स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट की मांग की।

शिकायत में उठाए गए पांच बड़े सवाल

शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण से मांग की थी कि—

1. जॉब नंबर 177/PE(PH)2013-14 और कॉन्ट्रैक्ट बॉन्ड 22/PE(WC-07)/2015-16 से संबंधित संपूर्ण टेंडर एवं अनुबंध अभिलेखों की जांच कराई जाए।


2. अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद भी कार्य जारी रहने के कारणों और उसकी वैधानिकता की जांच हो।


3. अनुबंध में स्वीकृत 96 वर्गमीटर तथा वास्तविक विज्ञापन क्षेत्रफल का संयुक्त भौतिक सत्यापन कराया जाए।


4. वर्ष 2015-16 से वर्तमान तक प्राप्त राजस्व, शुल्क, अनुबंध शर्तों के अनुपालन और भुगतान का स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए।


5. सरकारी राजस्व की हानि, अनुबंध उल्लंघन अथवा अन्य अनियमितता मिलने पर संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी राजस्व की वसूली सुनिश्चित की जाए।

 

प्राधिकरण का जवाब क्या कहता है?

नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक, बाह्य विज्ञापन आर.के. शर्मा की ओर से जारी जवाब में कहा गया है कि उक्त फुटओवर ब्रिज के पुनः संचालन एवं अनुरक्षण के लिए पुनः ई-निविदा की प्रक्रिया में पत्रावली है तथा संबंधित एजेंसी को पुनः ई-निविदा होने तक समयावधि के लिए प्रक्रिया में होने की जानकारी दी गई है।

यही जवाब अब पूरे मामले में नया सवाल खड़ा कर रहा है। शिकायत में जहां अनुबंध समाप्त होने के बाद गतिविधियां जारी रहने, विज्ञापन क्षेत्रफल बढ़ाए जाने और संभावित सरकारी राजस्व नुकसान की जांच की मांग की गई थी, वहीं प्राधिकरण ने अपने जवाब में इन आरोपों की जांच, वित्तीय ऑडिट या जिम्मेदारी तय करने के संबंध में कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं बताई है।

जवाब देने से बचते रहे वरिष्ठ प्रबंधक आर. के. शर्मा

बाह्य विज्ञापन को लेकर जब हमने अजीबोगरीब जवाब दाखिल करने वाले वरिष्ठ प्रबंधक आर. के. शर्मा से मिलकर पुरे गड़बड़झाले पर कार्रवाही की बात करनी चाही तो वरिष्ठ प्रबंधक साहब दफ़्तर में नहीं मिले वहीं दूरभाष को संपर्क करने पर वरिष्ठ प्रबंधक साहब ने अगले हफ्ते तक मीटिंग में व्यस्त होने का हवाला दिया,बात बात पर मीटिंग करने वाले अधिकारीगण शिकायत करने के बाद भी कार्रवाही के नाम पर लीपापोती में लगे रहते हैँ ज़ो अपने आप में सवालिया निशान खड़ा करती है।


जांच की मांग के बीच फिर उसी एजेंसी को मौका?

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब शिकायत में संबंधित एजेंसी चिनार इम्पेक्स के कामकाज, अनुबंध की शर्तों और सरकारी राजस्व से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए हैं, तब पहले इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और वास्तविक विज्ञापन क्षेत्रफल का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए या नहीं? यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकारी राजस्व की संभावित क्षति का आकलन और उसकी वसूली भी जरूरी होगी।

ऐसे में प्राधिकरण के जवाब से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ई-निविदा से पहले पुराने अनुबंध और उसके तहत हुए कामकाज की पूरी जांच होगी? साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अनुबंध अवधि समाप्त होने के बाद यदि विज्ञापन गतिविधियां जारी रहीं तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

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Author: आज का मुद्दा डिजिटल डेस्क

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